आज के समय में जब ज्यादातर छात्र दिन का कई घंटे Instagram, YouTube Shorts और WhatsApp पर बिताते हैं, उसी दुनिया में एक 17 वर्षीय छात्र ने अपने सपनों को इन distractions से ऊपर रखा। उसने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए अपने दोस्तों से दूरी बना ली और अपना पूरा ध्यान सिर्फ लक्ष्य पर केंद्रित किया — JEE Main में सफलता।
यह कहानी है दिल्ली के छात्र श्रेयस मिश्रा की, जिसने JEE Main 2026 में 100 percentile हासिल कर पूरे देश में अपनी पहचान बनाई। खास बात यह है कि देशभर के 13 लाख से अधिक छात्रों में से केवल 12 ही छात्र इस मुकाम तक पहुँच पाए, और श्रेयस उनमें से एक थे।
लेकिन यह सफलता अचानक नहीं मिली। इसके पीछे एक मजबूत mindset, disciplined routine और distractions से दूर रहने का कठिन निर्णय था।
सफलता का पहला कदम: Distractions से दूरी
श्रेयस ने अपनी तैयारी के दौरान सबसे बड़ा फैसला लिया, जो आज के समय की सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है | हम बात कर रहे हैं — आज के सोशल मीडिया प्लेटफार्म की |
श्रेयस ने अपने जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला लिया और अपने मोबाइल फ़ोन से सभी सोशल मीडिया एप्प हटा दिए । उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके फोकस को मजबूत करने में बहुत मददगार साबित हुआ।
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया सबसे बड़ा विकर्षण बन चुका है। हर अधिसूचना, हर सन्देश, और हर रील छात्रों का अवधान तोड़ देता है।
श्रेयस ने समझ लिया था कि अगर उन्हें असाधारण सफलता चाहिए, तो उन्हें असाधारण निर्णय लेने होंगे। यह निर्णय आसान नहीं था। क्योंकि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक संबंध का भी हिस्सा होता है। लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राथमिकता दी।
त्याग के बिना बड़ी सफलता संभव नहीं
श्रेयस ने केवल सोशल मीडिया ही नहीं छोड़ा, बल्कि दोस्तों के साथ समय बिताना भी कम कर दिया। यह त्याग भावनात्मक स्तर पर कठिन होता है, खासकर उस उम्र में जब दोस्त और सामाजिक जीवन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। लेकिन उन्होंने दीर्घकालिक सफलता को अल्पकालिक खुशी से ऊपर रखा।
यह मानसिकता हर सफल व्यक्ति में सामान्य होता है।
- जब दूसरे छात्र पार्टी कर रहे होते हैं, अव्वल छात्र पढ़ रहे होते हैं |
- जब दूसरे छात्र रील देख रहे होते हैं, अव्वल छात्र लक्ष्य को हासिल करने में लगे होते हैं |
- जब दूसरे छात्र बहाना बना रहे होते हैं, अव्वल छात्र अनुशासन पालन कर रहे होते हैं |
यही अंतर सामान्य और असाधारण छात्र के बीच होता है।
फोकस इतना मजबूत कि डर भी नहीं आया
JEE Main जैसे प्रतियोगी परीक्षा में दबाव और डर होना सामान्य है। लेकिन श्रेयस का आत्मविश्वास इतना मजबूत था कि उन्होंने कहा कि उन्हें तैयारी के दौरान कभी डर नहीं लगा।इसका कारण था उनकी तैयारी की रणनीति का। जब तैयारी मजबूत होती है, तो डर स्वतः कम हो जाता है। आत्मविश्वास तैयारी से आता है, प्रेरणा से नहीं।
लाखों छात्रों के बीच खुद को अलग बनाना
हर साल लाखों छात्र JEE Main की परीक्षा देते हैं, लेकिन केवल कुछ ही छात्र असाधारण सफलता हासिल कर पाते हैं। JEE Main केवल ज्ञान का परीक्षा नहीं है, बल्कि अनुशासन, धैर्य और मानसिक शक्ति का भी परख होता है।
श्रेयस ने यह साबित किया कि सफलता केवल बुद्धिमत्ता से नहीं, बल्कि स्थिरता से मिलती है। साधारण छात्र और टॉपर छात्र में अंतर IQ का नहीं, बल्कि आदतों का होता है।
इस कहानी से हर छात्र क्या सीख सकता है ?
श्रेयस मिश्रा की इस सफल यात्रा से हर छात्र के लिए शक्तिशाली सबक है:
1. Focus is the new Superpower
आज की दुनिया में फोकस सबसे दुर्लभ कौशल है। जो छात्र फोकस कर सकता है, वही आगे बढ़ सकता है।
2. भटकाव को नियंत्रण करना जरूरी है
सोशल मीडिया अल्पकालिक ख़ुशी देता है, लेकिन करियर पर स्थायी प्रभाव देता है।
3. अनुशासन, प्रेरणा से ज्यादा शक्तिशाली होता है
प्रेरणा अस्थायी होता है, जबकि अनुशासन स्थायी होता है।
4. त्याग, सफलता की कीमत होती है
हर बड़ी सफलता के पीछे कुछ त्याग होते हैं।
5. Consistency is the key
हर दिन थोड़ा-थोड़ा सुधार, लंबे समय में असाधारण परिणाम देता है।
असली जीत, परसेंटाइल नहीं, मानसिकता है
श्रेयस की कहानी केवल 100 परसेंटाइल की नहीं है, बल्कि मानसिकता की कहानी है। यह कहानी बताती है कि सफलता किसी विशेष प्रतिभा की मोहताज नहीं है। सफलता सही निर्णय, सही आदत और मजबूत फोकस का परिणाम होता है।
आज का छात्र अगर सिर्फ एक निर्णय ले ले — भटकाव कम करने का — तो उसकी जिंदगी बदल सकती है। क्योंकि सफलता फोन में नहीं, फोकस से मिलती है।