भारत में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से बढ़ रही है। हाल के वर्षों में सरकारी पहल Startup India Initiative ने नए उद्यमियों को प्रोत्साहन दिया है। 30 जून 2024 तक DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 1,40,803 थी और इनसे 15.53 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए। डिजिटल इंडिया, आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाएँ और निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण आज स्टार्टअप शुरू करना पहले से कहीं ज्यादा सरल हो गया है। विशेष रूप से महामारी और उसके बाद की चुनौतियों ने युवा वर्ग को नई सोच और नवाचार की ओर प्रेरित किया है। अब समय है अपना खुद का स्टार्टअप आइडिया लेकर आगे बढ़ने का – सही योजना और मार्गदर्शन से आप भी सफल उद्यमी बन सकते हैं।
1. स्टार्टअप क्या होता है?
स्टार्टअप एक नया उद्यम होता है जो नवीन (इनोवेटिव) उत्पाद या सेवा पर आधारित होता है और शीघ्र विकास की क्षमता रखता है। इसे सामान्य व्यापार से अलग बनाते हैं निम्नलिखित मुख्य विशेषताएँ:
- नया उद्यम: पहले से किसी अन्य व्यवसाय को विभाजित या पुनर्निर्मित करके नहीं बनाया गया होता।
- नवाचार (Innovation): उत्पाद, सेवा या प्रक्रिया में सुधार या नए तरीकों के विकास पर काम करता है।
- स्केलेबिलिटी (Scalability): उच्च विकास (Growth) क्षमता वाला मॉडल होता है जो बड़े स्तर पर विस्तार की अनुमति देता है।
- तेजी से विस्तार: छोटे समय में व्यापक स्तर पर कारोबार बढ़ाना इसका लक्ष्य होता है।
उदाहरण के लिए, अगर किसी ऐप ने स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए कोई अनूठी सुविधा दी और उसका उपयोग बढ़ता जा रहा है, तो वह एक स्टार्टअप हो सकता है। दूसरी ओर, अगर कोई पारंपरिक दुकान बस अधिकतम लाभ के लिए काम कर रही है, तो वह सामान्य व्यापार (बिज़नेस) होगा।
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2. भारत में स्टार्टअप शुरू करने के लिए जरूरी शर्तें
सरकार ने स्टार्टअप मान्यता के लिए कुछ दिग्गजीय और वित्तीय शर्तें तय की हैं:
- अवधि (Company Age): कंपनी या फर्म की स्थापना की तिथि से अधिकतम 10 साल (12 साल अगर Biotechnology में हो) होनी चाहिए।
- टर्नओवर सीमा: पिछले वित्तीय वर्ष में टर्नओवर ₹100 करोड़ से अधिक नहीं होना चाहिए।
- उद्देश्य: उद्यम को नवाचार या सुधार पर काम करना चाहिए तथा व्यापार मॉडल में रोजगार या संपत्ति सृजन की उच्च क्षमता होनी चाहिए।
- स्वतंत्र पहचान: यह पहले से किसी मौजूदा व्यवसाय का हिस्सा या उसकी पुनर्रचना (reconstruction) से बना नहीं होना चाहिए।
यदि आपका व्यवसाय इन शर्तों को पूरा करता है, तो आप DPIIT से स्टार्टअप मान्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं। मान्यता मिलने पर कई सरकारी योजनाओं एवं छूटों का लाभ उठाया जा सकता है।
3. स्टेप-बाय-स्टेप गाइड: भारत में स्टार्टअप कैसे शुरू करें
भारत में स्टार्टअप शुरू करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:
- फैक्ट आइडिया चुनें: सबसे पहले आपके पास एक सशक्त और अभिनव (innovative) आइडिया होना चाहिए जो किसी समस्या का समाधान करता हो। यह विचार बाजार की ज़रूरतों पर आधारित होना चाहिए। विस्तृत मार्केट रिसर्च करें कि आपके प्रोडक्ट या सर्विस की मांग है या नहीं।
- बाजार अनुसंधान (Market Research): संभावित प्रतियोगियों, लक्षित उपभोक्ता और मार्केट ट्रेंड्स के बारे में जानकारी इकट्ठा करें। प्रश्नावली या सर्वे के जरिए ग्राहक की आवश्यकताएँ समझें और यूजर फीडबैक से अपना प्रोडक्ट-मार्केट फिट परखें।
- व्यापार मॉडल (Business Model) तैयार करें: तय करें कि आपका स्टार्टअप पैसा कैसे कमाएगा। राजस्व मॉडल, मूल्य निर्धारण (pricing) और वितरण चैनल की रूपरेखा बनाएं। बिज़नेस प्लान में लागत-लाभ (cost-benefit) का साफ-साफ लेखा-जोखा होना चाहिए।
- व्यापार संरचना चुनें (Business Structure): अपनी कंपनी को
Private Limited CompanyयाLLPया पंजीकृतPartnershipके रूप में रजिस्टर करें। (ये DPIIT मान्यता के लिए स्वीकार्य संगठन हैं.) साधारण एकल स्वामी (प्रोप्राइटरशिप) में स्टार्टअप मान्यता नहीं मिलती। - कंपनी रजिस्ट्रेशन:
- SPICe+ फॉर्म: एमसीए की वेबसाइट पर SPICe+ (एकीकृत) फॉर्म भरें। इसके जरिए आप इकाई पंजीकरण के साथ साथ कंपनी का PAN और TAN भी तुरंत लागू कर सकते हैं।
- नाम तथा दस्तावेज: कंपनी के लिए अनूठा नाम चुनें और आवश्यक दस्तावेज़ जैसे पहचान-पत्र, पते के प्रमाण आदि अपलोड करें।
- Startup India Portal पर रजिस्ट्रेशन: रजिस्ट्रेशन के बाद DPIIT की Startup India पोर्टल (startupindia.gov.in) पर जाकर DPIIT मान्यता के लिए आवेदन करें। इसके लिए लॉगिन करके कंपनी की जानकारी, एक संक्षिप्त व्यापार विवरण, निदेशकों/साझेदारों के विवरण आदि सबमिट करना होता है। कोई शुल्क नहीं लगता।
- DPIIT Recognition प्राप्त करना: आवेदन जमा करने के बाद DPIIT से मान्यता प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। इसे ले कर आप सरकारी सुविधाएँ जैसे टैक्स छूट, फंडिंग स्कीम आदि के लिए पात्र हो जाते हैं। मान्यता मिलने के बाद Startup India (स्टार्टअप इंडिया) के सभी लाभ लेने के लिए आवश्यक कदम पूरे हो जाते हैं।
4. Startup शुरू करने के लिए जरूरी दस्तावेज
स्टार्टअप रजिस्ट्रेशन या DPIIT मान्यता के लिए निम्नलिखित मुख्य दस्तावेज अक्सर मांगे जाते हैं:
- Incorporation Certificate (इंकॉर्पोरेशन सर्टिफिकेट): आपकी कंपनी या फर्म का पंजीकरण प्रमाणपत्र, जो ROC द्वारा जारी किया गया हो। यह आपके व्यवसाय की “जन्म तिथि” साबित करता है। LLP के लिए LLP Agreement भी शामिल होता है। Partnership के लिए पंजीकृत पार्टनरशिप डीड।
- PAN कार्ड: कंपनी के नाम पर बना (आर्टिफिशियल पर्सन के रूप में) PAN कार्ड। इसके लिए आमतौर पर SPICe+ फॉर्म का उपयोग किया जाता है, जिससे रजिस्ट्रेशन के साथ साथ PAN भी उसी समय बन जाता है।
- आधार कार्ड: सभी निदेशकों/साझेदारों का आधार कार्ड या पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस (पहचान एवं पते के लिए)। यह पहचान-पता प्रमाण के लिए जरूरी होता है।
- व्यापार योजना (Business Plan) / पिच डेक: एक लिखित विवरण जिसमें आपके उत्पाद/सेवा, बाजार, राजस्व मॉडल और विकास योजना विस्तार से हो। इसमें ग्राहक की समस्या और आपका समाधान साफ दिखना चाहिए।
- प्रमाणपत्र और समझौते: कंपनी का MOA (Memorandum of Association) व AOA (Articles of Association), पार्टनरशिप डीड, इत्यादि (कंपनी/LLP के लिए)।
- MSME/Udyam सर्टिफिकेट (यदि हो): स्टार्टअप इंडिया रजिस्ट्रेशन के लिए अनिवार्य नहीं, लेकिन मौजूद होने पर सरकारी योजनाओं में मदद करता है।
- व्यक्तिगत घोषणा (Self-Certification): यह सत्यापित करने के लिए कि आपकी इकाई स्टार्टअप मानदंडों को पूरा करती है (उदाहरण: 10 वर्ष से कम पुरानी, 100 करोड़ से कम टर्नओवर, मूल/नवीन उद्यम)।
इन दस्तावेज़ों को तैयार रखें ताकि रजिस्ट्रेशन या मान्यता आवेदन सहज हो।
5. Startup India योजना के फायदे
DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को Startup India Initiative के तहत अनेक लाभ मिलते हैं:
- टैक्स में छूट (Tax Exemption): मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को पंजीकरण के बाद पहले 10 वर्षों में से 3 वित्तीय वर्ष तक आयकर में पूर्ण छूट मिलती है। साथ ही
एंजेल टैक्स(80IAC) से भी छूट रहती है जिससे पूंजी जुटाना आसान होता है। - फंडिंग सपोर्ट (Funding Support): स्टार्टअप इंडिया स्कीम के तहत फंड ऑफ फंड (10,000 करोड़ रुपये से अधिक), स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS) इत्यादि से ग्रांट प्राप्त करने की पात्रता मिलती है। शासन द्वारा विभिन्न प्रोत्साहन स्कीम और इनक्यूबेटर कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर होता है।
- आइपीआर सुविधा (IPR Benefits): पेटेंट, ट्रेडमार्क आदि में तेजी से आवेदन की प्रक्रिया होती है और 80% तक रियायत मिलती है। इससे नवाचार को सुरक्षा मिलती है।
- सरकारी खरीद में सुविधाएँ: सरकारी ठेकों (tenders) में आवेदन करते समय न्यूनतम अनुभव और टर्नओवर की श्रेणियाँ स्टार्टअप पर लागू नहीं होती। मान्यता प्राप्त स्टार्टअप सरकार के GeM पोर्टल पर सीधे बेच सकते हैं, जिससे बाजार तक पहुंच बढ़ती है।
- सरल नियम-कानून (Self Certification): श्रम और पर्यावरण कानूनों में स्वयं-सत्यापन की छूट (सरल नज़ीर) मिलती है, जिससे पहले कुछ वर्षों में जाँच कम हो जाती है।
ये लाभ स्टार्टअप को वैधानिक और वित्तीय दृष्टि से मज़बूत बनाते हैं, जिससे विकास में तेजी आती है।
6. भारत में स्टार्टअप फंडिंग के स्रोत
स्टार्टअप को शुरू करने और बढ़ाने के लिए वित्तपोषण (Funding) बहुत महत्वपूर्ण है। प्रमुख स्रोत निम्न हैं:
- बूटस्ट्रैपिंग (Bootstrapping): स्वयं की बचत, परिवार या मित्रों का निवेश. कई भारतीय संस्थापक अपनी सेविंग्स से शुरुआत करते हैं।
- एंजेल निवेशक (Angel Investors): उच्च नेट-वर्थ वाले व्यक्ति प्रारंभिक चरण में इक्विटी के बदले पूंजी और मार्गदर्शन देते हैं। भारतीय एंजेल नेटवर्क (जैसे IAN, Lead Angels) ने Ola, Byju’s जैसी कंपनियों को शुरुआती दौर में निवेश दिया है।
- वेंचर कैपिटल (VC): वेंचर कैपिटल फंड बड़े पैमाने पर पूंजी प्रदान करते हैं। वे तेजी से विस्तार करना चाहते स्टार्टअप में निवेश करते हैं। भारतीय VC (जैसे Sequoia India, Accel) ने Freshworks, Razorpay जैसी यूनिकॉर्न्स में निवेश किया है।
- सरकारी अनुदान एवं योजनाएँ: केंद्र और राज्य सरकार गैर-ऋण अनुदान योजनाएँ चलाती हैं (जैसे स्टार्टअप इंडिया सीड फंड स्कीम, SIDBI, CGTMSE आदि) जो नवाचारपूर्ण प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। ये कोष बिना इक्विटी के मिलते हैं और स्टार्टअप की विश्वसनीयता बढ़ाते हैं।
- इन्क्यूबेटर व एक्सेलेरेटर: T-Hub, NASSCOM 10K, Atal Incubation Centres जैसे कार्यक्रम में चयनित स्टार्टअप्स को कार्यस्थल, मेंटरशिप और प्रांरभिक फंडिंग मिलती है। इससे उत्पाद विकसित करने और व्यवसाय मॉडल सुधारने में मदद मिलती है।
- क्राउडफंडिंग और कॉर्पोरेट फंडिंग: उत्पाद या विचार को प्रदर्शित करके क्राउडफंडिंग (जैसे Ketto, Milaap) से फंड जुटाया जा सकता है। कुछ बड़े कॉर्पोरेट्स भी अपने वेंचर आर्म या पार्टनरशिप के जरिए स्टार्टअप में निवेश करते हैं।
इनमें से कई स्रोत स्टार्टअप की विकास अवस्था (Stage) पर निर्भर करते हैं। नए आइडिया के लिए बूटस्ट्रैपिंग या एंजेल निवेशक बेहतर होते हैं, जबकि विकसित उत्पाद को बाजार में ले जाने के लिए वेंचर कैपिटल या सरकारी अनुदान मददगार हैं।
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7. भारत में लोकप्रिय स्टार्टअप सेक्टर्स (2026)
कुछ सेक्टर ऐसी तकनीकी क्रांति की चपेट में हैं जहाँ स्टार्टअप तेजी से उभर रहे हैं:
- एजुकेशन टेक (EdTech): महामारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा बूम से EdTech स्टार्टअप्स लोकप्रिय हुए। बड़े फ़ंड मिले हैं और मान्यता प्राप्त Unicorn कंपनियाँ बनीं। पिछले दशक में भारतीय EdTech ने $13.1 बिलियन से अधिक की फंडिंग हासिल की है।
- फिनटेक (FinTech): भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा फिनटेक बाज़ार है। UPI और डिजिटल पेमेंट्स की सफलता के साथ Paytm, PhonePe जैसी कंपनियाँ तेज़ी से बढ़ीं। तिमाही भर में फिनटेक से अरबों डॉलर की पूंजी जुटी है।
- हेल्थटेक (HealthTech) और लाइफ साइंस: डिजिटल हेल्थ, बायोटेक और फार्मा में निवेश बढ़ा है। महामारी के बाद टेलिमेडिसिन, स्वास्थ्य ऐप्स और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों में काफी उछाल आया है। 2020-24 के बीच भारतीय लाइफ साइंस सेक्टर में लगभग $1.9 बिलियन का निवेश हुआ है।
- एग्रीटेक (Agritech): कृषि से जुड़े स्टार्टअप्स (जैसे स्मार्ट फार्मिंग, कृषि मार्केटप्लेस) बढ़ते जा रहे हैं। समाज और अर्थव्यवस्था पर इसके सकारात्मक प्रभाव के कारण निवेश बढ़ा है। अब तक कई अंशु-परिक्रय (Series A) फंडिंग देखी गई है।
- एआई और डीप टेक (AI & DeepTech): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और अन्य कटिंग-एज तकनीकों पर आधारित स्टार्टअप्स फंडिंग के लिहाज से शीर्ष पर आ गए हैं। गहराई से नई तकनीकों (जैसे क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक) में कई निवेशक दिलचस्पी ले रहे हैं।
इनके अलावा ग्रीन एनर्जी, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स और सास (SAAS) जैसे सेक्टर भी भारत में तेजी से उभर रहे हैं। विभिन्न स्रोतों के अनुसार भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तीसरे स्थान पर है और टेक्नोलॉजी-आधारित सेक्टर में नए अवसरों की कमी नहीं।
8. स्टार्टअप शुरू करते समय होने वाली आम गलतियाँ
नए उद्यमी अक्सर कुछ आम गलतियाँ कर बैठते हैं, जिन्हें टाला जाना चाहिए:
- बिना शोध के आइडिया पर काम: बहुत से स्टार्टअप ऐसा उत्पाद बनाते हैं जो बाजार में लोकप्रिया नहीं होता। ग्राहक की वास्तविक समस्या को समझकर ही प्रोडक्ट बनाएं।
- गलत सह-संस्थापक (Co-founder) चुनना: टीम या पार्टनरशिप में असमंजस, मूल्य/लक्ष्य असंगति से समस्या होती है। सामंजस्य और भरोसेमंद साथी चुनें।
- पूंजी पर अत्यधिक निर्भरता: केवल निवेश पर निर्भर होकर खर्च बढ़ाना जोखिम भरा है। लाभदायक मॉडल बनाने पर ध्यान दें।
- व्यवसाय मॉडल में कमी: बिना स्पष्ट राजस्व मॉडल के व्यवसाय अस्थिर रहता है।
- कानूनी और वित्तीय भूलें: अनिवार्य लाइसेंस, कर पालन या कॉरपोरेट गवर्नेंस पर ध्यान ना देना भविष्य में समस्या खड़ी कर सकता है।
इन गलतियों से बचने के लिए योजना बनाएं, लगातार मार्केट से सीखें और सलाहकारों (मेंटर्स) की मदद लें।
9. सफल भारतीय स्टार्टअप के उदाहरण
कई भारतीय स्टार्टअप ने अपनी उद्यमिता यात्रा से प्रेरणा दी है:
- Flipkart: 2007 में शुरू हुआ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, जिसने देश को ऑनलाइन शॉपिंग का हब बनाया। बाद में यह वॉलमार्ट द्वारा अधिग्रहित हुआ और भारतीय यूनिकॉर्न में शुमार है।
- Zerodha: 2010 में दो भाइयों ने बूटस्ट्रैप्ड मोड में शुरू किया, और धीरे-धीरे यह सबसे बड़े रिटेल ब्रोकरेज में बदल गया। बिना किसी बड़े निवेश के भी इसकी मुनाफे में रिकार्ड वृद्धि हुई।
- Zoho: सफ़ल सास (SaaS) कंपनी जो 1996 से घरेलू स्वरूप में चली आ रही है। इसने बिना बाहरी फंडिंग के उत्पाद विकसित किए और वैश्विक बाज़ार में पैठ बनाई।
- boAt: उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में युवा ब्रांड। इसे भी कम समय में करोड़ों की कंपनी बनाया गया।
ये उदाहरण दिखाते हैं कि सही योजना और मेहनत से भारतीय स्टार्टअप्स ग्लोबल स्तर पर मुकाम हासिल कर सकते हैं।
10. 2026 में स्टार्टअप इकोसिस्टम का भविष्य
सरकार और निवेशक लगातार स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहित कर रहे हैं। 2025 के प्रवृत्तियाँ बताते हैं कि:
तकनीकी रुझान: AI, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन इत्यादि में नए उद्यम उभरेंगे। कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में स्थानीय समस्याओं के समाधान तलाशने वाले स्टार्टअप्स को भी समर्थन मिलेगा।
कुल मिलाकर, भारत का स्टार्टअप वातावरण मजबूत होता जा रहा है। युवा उद्यमियों के लिए यह कैरियर की नई राह है, जहाँ सही योजना, नवीन सोच और सरकारी सहायताएँ मिलकर सफलता की संभावनाएँ बढ़ाती हैं।
सरकारी नीतियाँ: DPIIT नई पहलें ला रही है जैसे Domain-specific कोई C entre ऑफ़ Excellence, AGNIi, PRISM आदि। स्टार्टअप इंडिया स्कीम में समय-समय पर अपडेट्स आ रही हैं (जैसे कर छूट का विस्तार, ई-गवर्नेंस)।
फंडिंग में वृद्धि: हालांकि 2025 में फंडिंग में थोड़ी गिरावट आई थी, निवेशक अब सतत विकास पर ध्यान दे रहे हैं। निवेश कोषों में गहराई बढ़ रही है; उदाहरणतः 2025 में डीप टेक पर नए फंड्स लॉन्च हुए।
टियर-2/3 शहरों में अवसर: अब बड़ी संख्या में स्टार्टअप्स बड़े शहरों के बाहर भी पनप रही हैं। 2026 की शुरुआत में PIB रिपोर्ट के अनुसार 51% से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप टियर 2/3 शहरों से हैं। कम लागत, स्थानीय प्रतिभा और नए बाज़ार की वजह से छोटे शहरों में उद्यमिता बढ़ रही है।
FAQ
1. स्टार्टअप इंडिया पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
Startup India पोर्टल (startupindia.gov.in) पर जाएँ और ‘Apply for DPIIT Recognition’ पेज पर क्लिक करें। लॉगिन करके अपनी कंपनी की जानकारी, बिजनेस विवरण और निदेशकों/साझेदारों के दस्तावेज़ अपलोड करें। सभी विवरण सही भरें, फिर आवेदन सबमिट करें। सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन के बाद DPIIT मान्यता प्राप्त हो जाएगी।
2. DPIIT मान्यता के लाभ क्या हैं?
DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को टैक्स में छूट (पहले 10 साल में 3 वर्ष आयकर से मुक्त) और एंजेल टैक्स की छूट मिलती है। इसके अलावा ट्रेडमार्क/पेटेंट की फीस में रियायत, सरकारी खरीद (GeM) में आसान प्रवेश, श्रम-पर्यावरण कानूनों में स्वयं-सत्यापन, और सरकारी फंडिंग योजनाओं में पात्रता जैसे लाभ होते हैं।
3. स्टार्टअप शुरू करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
मुख्य दस्तावेजों में Certificate of Incorporation (पंजीकरण प्रमाणपत्र), PAN कार्ड (कंपनी/निदेशकों का), आधार कार्ड/पासपोर्ट (पहचान-पता के लिए), और बिजनेस प्लान शामिल हैं। कंपनियों के लिए MOA/AOA और LLP के लिए पार्टनरशिप डीड भी ज़रूरी होते हैं। DPIIT आवेदन में इन दस्तावेजों की स्कैन कॉपी जमा करनी होती है।
4. स्टार्टअप को टैक्स में किन-किन छूटों का लाभ मिलता है?
मान्यता प्राप्त स्टार्टअप पहली दस साल की अवधि में तीन वित्त वर्ष तक आयकर से पूरी तरह छूट पा सकता है। इसके अलावा निवेश पर लगाए जाने वाले एंजेल टैक्स (धारा 56(2)(viib)) से भी छूट मिलती है। पेटेंट/ट्रेडमार्क फाइलिंग की फीस में 80% तक की छूट मिलती है। इन छूटों के लिए DPIIT मान्यता अनिवार्य है।
5. स्टार्टअप शुरू करते समय कौन-सी आम गलतियाँ बचें?
नए स्टार्टअप में आमतौर पर बिना उचित रिसर्च के शुरू कर देना, गलत को-फाउंडर चुनना या अत्यधिक निवेश पर निर्भर होना जैसी गलतियाँ होती हैं। समाधान यह है कि पहले ग्राहकों की ज़रूरत समझें (प्रोडक्ट-मार्केट फिट पाएं), टीम की अच्छी जाँच-परख करें, और टाइट बजट में काम करते हुए टिकाऊ विकास मॉडल बनाएं। इन सावधानियों से फेल होने की संभावना घट जाती है।