उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए मुफ्त वितरण हेतु छपवाई गईं 13,000 से अधिक पाठ्यपुस्तकों को कबाड़ में बेच दिया गया। यह किताबें 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए थीं और इनका वितरण गरीब व जरूरतमंद छात्रों के बीच किया जाना था।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग, प्रशासन और सरकार के स्तर पर हड़कंप मच गया है। इस घटना ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा?
बहराइच के जिलाधिकारी (DM) अखिलेश त्रिपाठी (Akshay Tripathi) को 17 फरवरी को सूचना मिली कि एक स्थानीय कबाड़ व्यापारी ने बड़ी मात्रा में स्कूल की किताबें खरीदी हैं और उन्हें ट्रक के जरिए कहीं और भेजा जा रहा है।
सूचना मिलते ही प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ट्रक को पड़ोसी लखीमपुर जिले में रोक लिया और जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि यह किताबें सरकारी स्कूलों में मुफ्त वितरण के लिए थीं, लेकिन उन्हें गैरकानूनी तरीके से कबाड़ के रूप में बेच दिया गया था।
जिलाधिकारी के अनुसार, ट्रक से 10 टन से अधिक किताबें बरामद की गईं, जिन्हें आगे उत्तराखंड के काशीपुर में एक फर्म को भेजा जा रहा था।
Samagra Shiksha योजना के तहत छपी थीं किताबें
ये सभी किताबें केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजना “समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha)” के तहत छपवाई गई थीं। इस योजना का उद्देश्य प्राथमिक से लेकर कक्षा 12 तक के छात्रों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
सरकार हर साल लाखों छात्रों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराती है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र भी बिना किसी आर्थिक बोझ के पढ़ाई जारी रख सकें।
कितनी किताबें गायब थीं और कैसे पकड़ा गया मामला
स्टॉक वेरिफिकेशन के दौरान अधिकारियों को पता चला कि कुल 13,595 किताबें रिकॉर्ड से गायब थीं। बाद में जांच के दौरान यह किताबें एक कबाड़ व्यापारी के पास पाई गईं।
जांच में यह भी सामने आया कि किताबों को जानबूझकर सरकारी रिकॉर्ड से हटाकर गैरकानूनी रूप से बेच दिया गया था।
FIR दर्ज, अधिकारी सस्पेंड और जांच शुरू
इस मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई करते हुए कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस ने कबाड़ व्यापारी, ट्रक मालिक और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
इसके अलावा:
- विभाग के दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया
- एक जिला समन्वयक और एक प्रशिक्षक की सेवा समाप्त कर दी गई
- पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है
छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की घटनाएं न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी हैं, बल्कि गरीब छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।
ग्रामीण और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों छात्र इन मुफ्त किताबों पर निर्भर रहते हैं। यदि किताबें समय पर नहीं मिलतीं, तो छात्रों की पढ़ाई पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता पर सवाल
यह घटना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
- स्टॉक मैनेजमेंट सिस्टम को डिजिटल और पारदर्शी बनाना होगा
- जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है
- शिक्षा योजनाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए
सरकार और प्रशासन की आगे की कार्रवाई
जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नई निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी।
सरकार की कोशिश है कि छात्रों को समय पर किताबें उपलब्ध कराई जाएं और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी
उत्तर प्रदेश में 13,000 से अधिक किताबों को कबाड़ में बेचे जाने की घटना शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह घटना दिखाती है कि सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए मजबूत निगरानी और जवाबदेही बेहद जरूरी है।
यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन गरीब छात्रों को होगा, जिनके लिए ये योजनाएं बनाई गई हैं।

